सीबीएसई बोर्ड ने जारी की कड़ी चेतावनी अब नहीं चलेगी निजी स्कूलों की मनमानी* *- संशोधित शिक्षा नियमावली 2018

सीबीएसई बोर्ड ने जारी की कड़ी चेतावनी अब नहीं चलेगी निजी स्कूलों की मनमानी* *- संशोधित शिक्षा नियमावली 2018
अब निर्धारित पाठ्यक्रम से अलग मनचाहे प्रकाशकों की पुस्तकें नहीं थोप सकेगा निजी स्कूल
मान्यता से पहले निरीक्षण कमेटी को करानी होगी पूरे परिसर की विडियोग्राफी, स्कूल फंड की राशि का भी नहीं कर सकेंगे दुरुपयोग
स्कूल का हैड प्राचार्य को माना, डायरेक्टर जैसे पदों को नहीं कोई अहमियत, मनमानी फीस पर भी कसी नकेल
नई दिल्ली, अगर आपका बच्चा सीबीएसई से सम्बद्ध निजी स्कूल में पढ़ता है तो घबराने की जरूरत नहीं, क्योंकि सीबीएसई बोर्ड ने शिक्षा नियमावली 2018 जारी करते हुए निजी स्कूलों पर मनमानी पर कई मायनों में लगाम कस दी है। इतना ही नहीं अब सीबीएसई बोर्ड से सम्बद्ध निजी स्कूल निर्धारित पाठ्यक्रम की पुस्तकों के अलावा निजी लाभ के लिए प्राइवेट प्रकाशकों की किताबें बच्चों एवं उनके अभिभावकों पर नहीं थोप पाएंगे। इसके साथ साथ सीबीएसई बोर्ड ने नियमावली में संशोधन कर स्कूल फंड की राशि का दुरुपयोग रोकने के लिए भी बड़ा कदम उठाया है। सीबीएसई ने नियमावली में स्पष्ट चेतावनी दी है कि कोई भी निजी स्कूल सोसायटी, ट्रस्ट और निजी कम्पनी को स्कूल फंड की राशि नहीं दे सकेगा, ऐसा करने वाले स्कूल की मान्यता पर भी संकट के बादल मंडरा जाएंगे। सबसे अहम तो सीबीएसई बोर्ड से सम्बंद्ध हरियाणा में स्थापित दस साल पुराने निजी स्कूलों को भी फिर से मान्यता लेने के लिए स्कूल निरीक्षण कमेटी द्वारा पूरे परिसर की विडियोग्राफी भी करानी अनिवार्य की गई है। जबकि नियमावली संशोधन में यह भी स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि अगर कोई भी निजी स्कूल सीबीएसई द्वारा निर्धारित मापदंडों की अनुपालना नहीं करता तो उनके खिलाफ पांच लाख रुपये तक का जुर्माना किए जाने के साथ साथ उनकी सम्बद्धता रदद किए जाने का भी प्रावधान कर दिया गया है। इसके साथ साथ सीबीएसई बोर्ड ऐसे निजी स्कूलों की अवनती(डिमोशन) भी कर सकता है। सीबीएसई की नई गाइडलाइन जारी होने के बाद सैकड़ों ऐसे निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लग गई हैं, जो हर साल मनमाने ढंग से ना केवल बच्चों के अभिभावकों पर भारी भरकम फीस का बोझ लाद देते थे, बल्कि निजी प्रकाशकों के साथ मिलकर कमीशनखोरी का गोरखधंधा भी चलाते थे। इसके साथ साथ निजी स्कूलों की प्रबंधकारिणी समितियों की गतिविधियों पर भी कड़ी निगरानी सीबीएसई बोर्ड द्वारा रखी जाएगी, जिससे उनके स्टूडेंट फड़ की करोड़ों रुपयों की राशि पर मनमाने ढंग से दुरुपयोग पर भी नकेल कसी जा सकेगी।
 
*ये है स्लेबस की गाइडलाइन*
सीबीएसई द्वारा संशोधित शिक्षा नियमावली में यह स्पष्ट किया गया है कि चैप्टर 2 के नियम 2,4,6 के तहत एनसीईआरटी द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम को ही सीबीएसई बोर्ड के निजी स्कूलों पढ़ाना होगा, इस पाठयक्रम से अलग किसी भी प्रकाशक की पुस्तकें निजी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाना पूर्ण रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है। आम तौर पर निजी प्रकाशकों की पुस्तकें जो काफी महंगी होती है, उन्हें बच्चों पर थोप दिया जाता है, जिसमें कमीशनखोरी का भी मोटा घालमेल होता है, निजी स्कूलों की इस मनमानी से हर साल अभिभावकों की जेब पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढऩे के साथ ही उन्हें करोड़ों का चुना लग जाता है। जबकि एनसीईआरटी की पुस्तकें काफी सस्ते में उपलब्ध हो जाती हैं।
 
*निजी स्कूलों की मान्यता के लिए भी सख्त हुए नियम*
सीबीएसई बोर्ड ने अब निजी स्कूलों को मान्यता देने के नियम भी कड़े कर दिए हैं। सीबीएसई के चैप्टर 11 के नियम 11.7.12 के तहत इन नियमों में निजी स्कूलों को किसी तरह की कोई छुट भी गुजाइश भी नहीं छोड़ी गई है वहीं सभी नियमों पर खरा उतरने के बाद ही मान्यता और सम्बद्धता पर बोर्ड द्वारा विचार किया जाएगा। इतना ही नहीं पुराने मान्यता वाले निजी स्कूलों के लिए भी ये नियम कड़े किए गए हैं। पुराने एवं नई मान्यता लेने वाले स्कूलों की निरीक्षण कमेटी द्वारा विडियोग्राफी कराई जाएगी। जिसमें क्लास रूम, लैबोरेट्री, प्लेग्राउंड, बाउंडरीवाल सहित अन्य हिस्सों की भी विडियोग्राफी कराई जाएगी, जिसे मान्यता देते समय अहम दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। 
 
*नियमों की अनदेखी पर सीबीएसई की कड़ी चेतावनी, पांच लाख का जुर्माना, होगी मान्यता भी रदद*
सीबीएसई ने नियमावली में संशोधन के साथ ही निजी स्कूलों के लिए कड़ी चेतावनी जारी कर दी गई है। सीबीएसई के चैप्टर 12 के नियम 12.1.2 के तहत यह भी स्पष्ट किया गया है कि अगर कोई भी निजी स्कूल सीबीएसई की गाइडलाइन का उल्लंघन करता है तो उस पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना ठोके जाने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा नियम 12.1.3 के अंतर्गत निजी स्कूल का डिमोशन(अवनती) किए जाने का प्रावधान किया गया है। जबकि नियम 12.1.9 के तहत कड़ी चेतावनी के बावजूद नियमों का उल्लंघन करने पर निजी स्कूल की मान्यता वापस लिए जाने का प्रावधान कर दिया गया है।  
 
*नहीं चलेगी निजी स्कूलों में मैनेजमेंट की मनमानी*
सीबीएसई ने ना केवल पाठ्यक्रम को लेकर ही निजी स्कूलों पर लगाम कसी है, बल्कि निजी स्कूलों की प्रबंधकारिणी(स्कूल मैनेजमेंट) पर भी नियमों का कड़ा पहरा बैठा दिया है। सीबीएसई द्वारा संशोधित नियमावली के चैप्टर 6 के अंतर्गत नियम 6.2 में यह स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बच्चों से वसूली जाने वाली फीस की राशि को किसी सोसायटी, ट्रस्ट, कम्पनी व मैनेजमेंट कमेटी के द्वारा अपने निजी हितों को साधने के लिए कतई इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। इतना ही नहीं स्कूल के फंड को सही तरीके से उपयोग में लाया जाएगा। जिसकी पारदर्शिता कार्यप्रणाली भी सीबीएसई की निगरानी में रहेगी। इन नियमों का उल्लंघन करने पर भी मान्यता पर संकट के साथ साथ पांच लाख तक का जुर्माना ठोके जाने की व्यवस्था की गई है। स्कूल के अंदर सभी प्रकार के फंडों को पारदर्शिता के तहत इस्तेमाल करना होगा।
 
*फीस बढ़ोत्तरी व पाठ्यक्रम को लेकर दिसम्बर माह में हाई कोर्ट के अंदर होगी सुनवाई*: सीबीएसई बोर्ड से जुड़े निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए  कई संगठन द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में भी कई बार याचिका लगाई गई, जिसके अंतर्गत निजी स्कूलों पर लगाम लगाने के लिए आखिरकार सीबीएसई बोर्ड द्वारा पुरानी शिक्षा नियमावली में व्यापक स्तर पर संशोधन कर 18 अक्टूबर 2018 को संशोधित नियमावली 2018 जारी कर दी गई है। इस नियमावली में निजी स्कूलों की मनमानी पर काफी हद तक अंकुश लगेगा वहीं लाखों बच्चों के हितों के साथ स्कूल प्रबंधन मनमानी कर खिलवाड़ नहीं कर पाएगा। इसके साथ ही निजी स्कूलों द्वारा फीस बढ़ोत्तरी एवं पाठ्यक्रम की पुस्तकों को लागू कराए जाने के मामले में दिसम्बर माह में माननीय उच्च न्यायालय में सुनवाई भी निर्धारित की हुई है।